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ग्लूकोमा
* ग्लूकोमा को आम भाषा में काला मोतिया कहते हैं
* आंख के अंदर अंगों के पोषण के लिए एक तरल पदार्थ उत्पन्न होता है पोषक के बाद यह तरल पदार्थ आंख के महीन छिद्र (फिल्टर) से बाहर निकलते हैं उम्र के साथ छिद्र तंग होने शुरू हो जाते हैं
* इससे तरल पदार्थ के निकलने की प्रक्रिया थोड़ी बाधित होती है इससे आंख का प्रेशर बढ़ने लगता है
* आंख का बढ़ा प्रेशर ऑप्टिक नर्व (आंखों से दिमाग को सिग्नल भेजने वाली नर्व) को डैमेज करता है
* आमतौर पर ऐसा आंखों पर ज्यादा जोर पड़ने से होता है दरअसल, ऑप्टिक नर्व काफी सेंसिटिव हैं, इसलिए जरा भी ज्यादा प्रेशर पड़ने पर यह ब्लॉक हो जाती है इससे दिखना बंद हो जाता है
* ग्लूकोमा दो तरह के होते हैं
● ओपेन एंगल ग्लूकोमा धीरे-धीरे बढ़ता है और मरीजों को पता ही नहीं चलता
* जब आंख के बढ़े प्रेशर से ऑप्टिक नर्व खराब हो जाती है तो उसे ओपेन एंगल ग्लूकोमा कहते हैं यह सबसे ज्यादा कॉमन है
* इसमें तरल पदार्थ को ड्रेन करने वाली कनैल ब्लॉक हो जाती है, जिससे आंख का प्रेशर बढ़ जाता है
* इसके होने से आंख की नजर धीरे-धीरे कमजोर होती है यदि इसका समय रहते पता चल जाए तो आंख की रोशनी बचाई जा सकती है वरना इसका कोई इलाज नहीं है
* ओपेन एंगल ग्लूकोमा के लक्षण
> हलका सिर में दर्द
> आंख में भारीपन
> नजदीक का चश्मा बार-बार बदलना
> बल्ब बुझने के कुछ देर बाद भी नहीं दिखना
● एंगल क्लोजर ग्लूकोमा कम खतरनाक है और इसका इलाज उपलब्ध है
* इसमें मरीज को अचानक अटैक पड़ता है और नजर कमजोर हो जाती है
* इसमें बहुत तेज दर्द होता है और मरीज सीधे डाक्टर के पास पहुंचता है
* ये हैं लक्षण
> भयंकर दर्द होता है
> आधे सिर में दर्द होता है
> उल्टी आने की आशंका रहती है
> अचानक से नंबर कम हो जाता है
● ये रिस्क फैक्टर हैं तो ग्लूकोमा हो सकता है
> परिवार के किसी सदस्य को हुआ हो
> यदि शुगर के मरीज हैं तो
> माइनेस नंबर है और बार-बार कम हो रहा है
> 40वर्ष के उम्र के पार हैं
> अंधेरे में देर से नजर आना
> रोशनी में अलग-अलग रंग दिखना
> अस्थ्मा व आथराइटिस जैसे रोगों में लंबे समय तक स्टेरायल ले रहे हों
> कभी आंख का कोई जख्म हुआ हो या कोई सर्जरी हुई हो
> यह बच्चों में भी हो सकता है।
आंखों की चली जाती है रोशनी
* ग्लूकोमा के बारे में सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि इसके चलते नजर का जो नुकसान हो गया, उसका कोई इलाज नहीं है
* अगर पता न चले तो यह मर्ज धीरे धीरे बढ़ता रहता है और ज्यादा बढ़ जाने पर अंधेपन की भी नौबत आ सकती है
* हां, अगर इसका पता वक्त रहते चल जाए तो आगे और नुकसान से बचने के लिए इलाज और देखभाल की जा सकती है
● 40 के बाद रुटीन चेकअप कराएं
* 40 साल की उम्र के बाद ग्लूकोमा होने के चांस बढ़ जाते हैं 40 की उम्र के बाद आंखों का रेग्युलर चेकअप कराते रहें
* हो सकता है इस उम्र के लोगों को लगे कि उनकी नजर मोतियाबिंद की वजह से कमजोर हो रही है, लेकिन हो सकता है कि नजर की कमजोरी ग्लूकोमा की वजह से हो ऐसे में सलाह यह है कि 40 की उम्र के बाद आंखों का रुटीन चेकअप कराते रहें
* आपके लिए विशेष जानकारी
अक्सर 40 की उम्र में लोगों की पास की नजर कमजोर पड़ने लगती है आम तौर पर लोग पास की चश्मे की दुकान में जाते हैं और अपनी आंखे टेस्ट करवाते हैं
* दुकानदार सिर्फ आंख टेस्ट कर बढ़िया चश्मा दे देता है उससे लोगों को अच्छा दिखता है और वे चलते बनते हैं, लेकिन जब भी इस उम्र में चश्मा बनवाएं तो अच्छे डाक्टर से आंखों का पूरा चेकअप करवाएं
● ग्लूकोमा से बचने के उपाय
> घर में अगर किसी को ग्लूकोमा है तो बच्चे को होने की ज्यादा संभावना होती है क्योंकि यह एक आनुवांशिक बीमारी है ऐसे में बच्चे की आंखों की जांच करवा लीजिए
> आंखों की एलर्जी, अस्थमा, चर्म रोग या किसी अन्य रोग के लिए स्टेरॉइड दवाओं का प्रयोग करने से आंखों में दिक्कत आ जाती है ऐसी दवाईयों के सेवन से बचे
> आंखों में दर्द हो या आंखें लाल हो जाएं तो स्पेशलिस्ट डॉक्टर से सलाह लेकर ही दवा का प्रयोग करें
> खेलने के दौरान (टेनिस या क्रिकेट बॉल से) अगर आंखों में चोट लग जाए तो इसका इलाज कराएं
> आंखों में कभी किसी प्रकार की कोई सर्जरी हुई हो या कोई घाव हो गया हो तो उसकी जांच समय-समय पर करवाते रहें, क्योंकि सर्जरी से ग्लूकोमा होने का खतरा बढ़ जाता है
> हर दो साल में आंखों की नियमित जांच करवाते रहिए चेकअप करवाने से आंखों की रोशनी का पता लगाया जा सकता है
> अगर आपके चश्मे का नंबर बदल रहा है तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क कीजिए
> जब आप सीधे देख रहें हों तो आंखों के किनारे से न दिखाई दे रहा हो तब आंखों की जांच करवाएं
> आंखों में दर्द हो, सिर और पेट में दर्द हो तो इसको नजरअंदाज मत कीजिए, तुरंत चिकित्सक से संपर्क कीजिए
> आंखों को पोषण देने वाले तत्वों  जैसे बादाम, दूध, संतरे का जूस, खरबूजे, अंडा, सोयाबीन का दूध, मूंगफली आदि का ज्यादा मात्रा में सेवन कीजिए
● ये भी सावधानी बरतें
> आंखों में कोई भी ड्रॉप डालने से पहले अपने हाथों में अच्छी तरह धो लें
> दवाई को ठंडी और ड्राई जगह पर रखें
> एक बार में एक ही ड्रॉप डालें और दो दवाइयों के बीच में आधा घंटे का गैप जरूर करें
> अगर आप अपने आई स्पेशलिस्ट से लगातार मिलते रहते हैं और समय से दवाइयां लेते हैं , तो आप अपने ग्लूकोमा को समय से कंट्रोल करके एक नॉर्मल लाइफ जी सकते हैं
● ग्लूकोमा से जुड़े कुछ तथ्य
* दुनिया भर में 10 में से 1 आदमी ग्लूकोमा से पीड़ित है
* दुनिया भर में करीब साढ़े छह करोड़ लोगों को ग्लूकोमा है
* भारत में एक करोड़ से ज्यादा लोगों को ग्लूकोमा है इनमें से करीब 10 लाख लोग अंधेपन का शिकार हो चुके हैं
* भारत में अंधेपन के 100 में से 12 केस ग्लूकोमा की वजह से हैं

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