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केंद्र-राज्य संबंध 
केंद्र-राज्य संबंध की बात करें तो यह संविधान के 245 से 255 के अनुच्छेद का भाग XI में केंद्र और राज्यों के बीच विधायी संबंधों से सम्बंधित है।
2. संविधान में तीन प्रकार की सूचियों का उल्लेख किया गया है।

संघ सूची

राज्य सूची

समवर्ती सूची

3. संघ सूची उन विषयों के बारे में बताती है जिन पर केवल केंद्रीय संसद ही कानून बना सकती है।

4. राज्य सूची उन विषयों के बारे में बताती है जिन पर भारत में 'सामान्य परिस्थितियों में' केवल राज्य सरकार कानून बना सकती है।

5. समवर्ती सूची उन विषयों के बारे में बताती है जिन पर दोनों संघ और राज्यों को कानून बनाने का अधिका है।

6. संघ सूची में वर्तमान में 100 विषयों शामिल हैं जबकि मूल रूप में 97 विषय शामिल थे।

7. संघ सूची में शामिल कुछ विषय है - रक्षा, बैंकिंग, विदेशी मामलों, मुद्रा, परमाणु ऊर्जा, बीमा, संचार, अंतर-राज्यीय व्यापार और वाणिज्य, जनगणना, लेखा परीक्षा आदि।

8. राज्य सूची में वर्तमान में 61 विषय शामिल जबकि मूल रूप से 66 विषय शामिल थे।

9. राज्य सूची में शामिल कुछ विषय है - सार्वजनिक व्यवस्था, पुलिस, सार्वजनिक स्वास्थ्य और स्वच्छता, कृषि, जेल, स्थानीय सरकार, मछली पालन, बाजार, सिनेमाघर, जुआ आदि।
केंद्र-राज्य संबंध
10. समवर्ती सूची में वर्तमान में 52 विषयों शामिल हैं जबकि मूल रूप से इसमें 47 विषय शामिल थे)।

11. समवर्ती सूची में शामिल कुछ विषय है - आपराधिक कानून और प्रक्रिया, सिविल प्रक्रिया, विवाह और तलाक, आबादी नियंत्रण और परिवार नियोजन, बिजली, श्रम कल्याण, आर्थिक और सामाजिक नियोजन, ड्रग्स, समाचार पत्र, किताबें और छपाई प्रेस, आदि

12. यदि राज्य सभा राष्ट्रीय हित में यह निर्णय लेती है कि संसद को राज्य सूची के किसी विषय पर कानून बनाना चाहिए, तो संसद उस मामले में कानून बनाने के लिए अधिकर्त हो जाती है। इस तरह के प्रस्ताव को वर्तमान सदस्यों और मतदान के दो-तिहाई सदस्यों द्वारा समर्थित होना चाहिए। यह प्रस्ताव एक वर्ष के लिए लागू रहता है। इसे अनेको बार नवीनीकृत किया जा सकता है, लेकिन एक समय में एक साल से अधिक नहीं । (अनुच्छेद 249)

13. इसके अलावा, देश में आपातकाल की घोषणा की स्थिथि में संसद को राज्य सूची से सम्बंधित मामलों में कानून बनाने का अधिकार है। (अनुच्छेद 250)

14. इसके अलावा, जब दो या अधिक राज्य विधायिका राज्य सूची से सम्बंधित किसी मामले पर कानून बनाने के लिए संसद से अनुरोध करते है, तो संसद उस मामले को विनियमित करने के लिए कानून बना सकती है। ऐसा कानून केवल उन राज्यों पर लागू होता है, जिन्होंने उस प्रस्ताव को पारित किया है। हालांकि कोई अन्य राज्य भी उसी कानून को लागु करने के लिए एक एक प्रस्ताव पारित कर सकती है। इस तरह के कानून को केवल संसद द्वारा संशोधित या निरस्त किया जा सकता है न कि संबंधित राज्यों की विधायिकाओं द्वारा। (अनुच्छेद 252)

15. संसद अंतरराष्ट्रीय संधियों, समझौतों या सम्मेलनों को लागू करने के लिए राज्य सूची के किसी भी मामले पर कानून बना सकती है। (अनुच्छेद 253)
नोट - संसद के पास किसी भी मामले पर कानून बनाने का अधिकार है, जो राज्य सूची या समवर्ती सूची में उल्लिखित नहीं है – इन्हें कानून की अवशिष्ट शक्तियां कहते हैंI (अनुच्छेद 248)

17. सरकारिया आयोग, रजमान्नर आयोग और पूंछी आयोग केंद्र-राज्य संबंधों पर आधारित कुछ महत्वपूर्ण आयोग है।

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