Ad

www.wifistudy.xyz
कोरोना वायरस की चपेट में अर्थव्यवस्था

कोरोना वायरस का अर्थव्यवस्था पर प्रभाव 

कोरोना वायरस का अर्थव्यवस्था पर प्रभाव पब्लिक हेल्थ के लिए एमर्जेंसी का मुद्दा तो बना ही हुआ है।
  • लेकिन अब इसका असर वैश्विक अर्थव्यवस्था पर भी साफ साफ दिखाई देने लगा है । चीन से शुरु हुए कोरोना वायरस की चपेट में दुनिया के कई देशों के आने से वैश्विक कारोबार में काफी गिरावट की आशंका जताई जा रही है। 
  • पिछले कुछ समय से कोरोना वायरस के कारण दुनियाभर के बाजारों में गिरावट का रुख जारी है, चीन के अलावा अन्य देशों में गुण वर्ष के मामले आने के बाद कई देशों में बंद जैसी स्थिती है। तथा कुछ अर्थशास्त्रियों का कहना है कि अगर यह अयसे ही रहा तो वैश्विक अर्थव्यवस्था तबाह हो सकती है।


भारत मे कोरोना वायरल से भारत मे आर्थिक प्रभाव -

भारत में भी कोरोनावायरस के कुछ मामले पाये गये हैं । वित्त मंत्री निर्मला सीतारमन ने कहा है कि सरकार अर्थव्यवस्था पर कोरोना के असर को लेकर सचेत हैं। और इस माल में विभिन्न स्तर पर विकल्पों को देखा जा रहा है ।
  • जिनमें से कुछ विशेष क्षेत्रों के लिए वैकल्पिक स्रोतों से कच्चा माल हवाई जहाज के जरिए मंगवाने की व्यवस्था भी शामिल हैं ।
  • ऐसे में सवाल है कि कोरोना वायरस ग्लोबल इकनॉमी और भारतीय अर्थव्यवस्था किस तरह प्रभावित होंगी। सवाल है कि कोरोना वायरस के असर को लेकर किस तरह की आशंकाएं जताई जा रही है।

भारत को इस वायरस के चलते आने वाली चुनौतियों से निपटना के लिए किस तरह की तयारी करने की जरूरत है। तो आइए विचार करते हैं ।
www.wifistudy.xyz
कोरोना वायरस की चपेट में अर्थव्यवस्था

प्रश्न :-  कोरोना वायरस क्या है तथा इससे चीन की अर्थव्यवस्था पर क्या प्रभाव पड़ा ?

उत्तर :- कोरोना वायरस या covid 19 का संबंध वायरस के ऐसे परिवार से है । जिसके संक्रमण से जुकाम से लेकर सांस लेने तक में तकलीफ जैसी समस्या हो सकती है ।
  • इस यूनिक प्रकार के वायरस को पहले कभी इंसानों में नहीं देखा गया है ।
  • पिछले साल दिसंबर में चीन के वुहान में कोरोना वायरस का संक्रमण शुरू हुआ था ।
  •  तब तक इस वायरस को फैलने से रोकने वाला कोई टीका नहीं बन सका है। 
  • कोरोना वायरस का संक्रमण लगातार बढ़ता जा रहा है। चीन से बाहर 59 देशों में कोरोना वायरस संक्रमण फैलने की पुष्टि हुई है।
  • आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक अब तक कोरोना वायरस के चलते दुनियाभर में तकरीबन 3000 लोगों की मौत हो चुकी है। और कोरोना वायरस के 87 हज़ार से ज्यादा मामले प्रकाश में आए हैं। ये आंकड़े लगातार बढ़ते जा रहे हैं।
  • कोरोना वायरस के कारण चीन में चार प्रांत और करीब पचास शहरों में लॉकडाउन है। इसके चलते चीन में मोबाइल, कंप्यूटर, इलेक्ट्रॉनिक उपकरण, आटो मोबाइल, फॉर्मा और टेक्सटाइल जैसे अनेकों उद्योगों की ज्यादातर फैक्ट्रियां अस्थायी रूप से बंद हो चुकी है ।
  • कोरोना वायरस फैलने के डर से वहाकि कई  क्षेत्र में परिवर्तन कम कर दिया गया हैं ।
  •  इसका नतीजा यह हुआ है कि चाहे नेचुरल गैस हो या पेट्रोलियम पदार्थ उसके खपत में कमी आई है।  इससे कच्चे तेल की मांग में कमी आई है। कोरोना वायरस की वजह से चीनी व्यापार थम सा गया है।
  • यहाँ पर्यटन पर भी काफी नकारात्मक प्रभाव पड़ा है।
  • कंसल्टेंसी ऑक्सफोर्ड इकोनॉमिक्स के मुताबिक कोरोना वायरस अगर महामारी का रूप लेता है। तो दो 2020 से पहली तिमाही में चीन की अर्थव्यवस्था पिछले साल के मुकाबले 4 प्रतिशत कम की दर से आगे बढ़ेगी ।
  • इस एजेंसी के अनुसार वर्ष 2020 में चीन की अर्थव्यवस्था 5.6 प्रतिशत की औसत दर से आगे बढ़ेगी।
  •  इससे पहले 2002-03 में सरश वायरस इसकी वजह से ऐसे ही वैश्विक खतरे पैदा हो गए थे उस वक्त दुनियाभर में सात सौ से ज्यादा लोगों की मौत हुई थी । उस वक्त दुनिया भर में 700 से ज्यादा लोगों की मौत हुई थी और हजारों लोग इससे संक्रमित हुए थे।
 इस संक्रमण का असर आर्थिक गतिविधियों पर भी पड़ा था ।

ऐसे ही जीका , निपा और इबोला वायरस भी पहले मुश्किल खड़ी कर चूके हैं।
  •  लेकिन इसकी तुलना में अब हालात और ज्यादा भयानक हो गए हैं । इसके चपेट में वैश्विक अर्थव्यवस्था भी आ गई है।
    www.wifistudy.xyz
    कोरोना वायरस की चपेट में अर्थव्यवस्था


 कोरोना वायरस के तेजी से फैलने के कारण वैश्विक अर्थव्यवस्था पर प्रभाव 

कोरोना वायरस से वैश्वीकरण के दौर में कोई भी देश अलग थलग नहीं रह सकता । कोरोना वायरस के खतरों से पता चलता है एक देश में होने वाली घटनाओं से दुनिया किस तरह प्रभावित हो सकती है।
  •  कोरोना वायरस की वजह से अर्थव्यवस्था पर पड़ रहे असर का सबसे बड़ा कारण निर्यात क्षेत्र में चीन की भागीदारी है।
  • चीन वैश्विक व्यापार में बड़ा देश है। और वस्तुओं के कुल वैश्विक निर्यात में उसका योगदान लगभग 13 फीसद है।
  • ऐसे में पहले दुनिया की दो बड़ी अर्थव्यवस्था चीन और अमेरिका के बीच ट्रेड वॉर के कारण कारोबार में सुस्ती और कोरोना वायरस के कारण बने हालातों ने विश्व व्यापार के लिए आग में घी का काम किया है ।
  • जिसका असर पूरी दुनिया पर पड़ना तय है, इसमें सबसे बड़ी चिंता का विषय यह है कि कोरोना वायरस के कारण वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला पर असर पड़ रहा है।
  • क्योंकि कोरोना वायरस के कारण उत्पादन और फ़्रेश सप्लाई बंद हो गई है।
  • ऐसे में बंद कारखाने चीन की विनिर्माण आपूर्ति श्रृंखला निरभर देशों और कंपनियों के लिए समस्या बन गए हैं।
  • इससे ग्लोबल सप्लाई चेन में शामिल सभी लोगों के रोजगार पर भी असर पड़ा है।
  • कोरोना वायरस के कारण शेयर बाजारों और तेल के भाव में गिरावट देखी जा रही हैं।  इससे घबराए निवेशक सुरक्षित विकल्पों में निवेश को तरजीह दे रहे हैं 
  • अन्य एशियाई बाजारों में चीन का शंघाई, जापान का निक्की , दक्षिण कोरिया कॉफी और हांगकांग के हेंग सेंग अच्छा खासा नुकसान रहा।
  • फ्लाइट कैंसिल किये जाने से विमानन क्षेत्रों पर गहरा असर पड़ा है ।
  • लोग पर्यटन के लिए यात्रा नहीं कर रहे हैं, ऐसे में होटल हॉस्पिटैलिटी ट्रांसपोर्ट आदि पर असर पड़ा है।
  •  यानी पर्यटन से लेकर अर्थव्यवस्था तक हर क्षेत्रों पर इसवारा की मार देखी जा रही है।
  • रेटिंग एजेंसी मूडीज के मुताबिक वैश्विक अर्थव्यवस्था की विकास दर में करुणा की वजह से इस साल 0.4 फीसद की गिरावट हो सकती है।

 पहले वर्ष 2020 के लिए वैश्विक विकास दर में 2.8 फीसद की बढ़ोतरी का अनुमान लगाया गया था।  जिसे घटाकर अब 2.4 प्रतिशत कर दिया गया है।
www.wifistudy.xyz
कोरोना वायरस की चपेट में अर्थव्यवस्था

 प्रश्न - कोरोना वायरस के चलते वैश्विक अर्थव्यवस्था पर गहराते संकट के क्या कारण है?
उत्तर -  चीन आज दुनिया के लिए एक मैन्यूफैक्चरिंग हब है। यहाँ से दुनिया के कई देशों में कच्चा माल और तैयार माल एक्सपोर्ट और इंपोर्ट किया जाता है। यानी चीन एक बड़ा आयातक और निर्यातक देश है।
  •  मोबाइल,  कंप्यूटर ,आटो मोबाइल और इलेक्ट्रॉनिक्स इंडस्ट्री के मामले में चीन को बेताज बादशाह माना जाता है।
  • हुवावे आईफोन ई-फोन, सौम्य, वीवो और ओप्पो जैसी तमाम दुनिया की बड़ी बड़ी टेक कंपनियां या तो चीन में मैन्युफैक्चरिंग करती है। या वहाँ से पाठ हासिल करती है ।
  • लेकिन कोरोना वायरस के प्रकोप की वजह से टेक कंपनियों की आपूर्ति पर असर पड़ा है।
  • चीन इंडस्ट्रीज के विनिर्मित उत्पाद और इनके कलपुर्जे दुनिया के कई देशों में भारी मात्रा में निर्यात करता है।  पर चीन में कोरोना वायरस के कारण बनी स्थितियों के बाद विभिन्न देश चीन से सहज रूप से आयात निर्यात नहीं कर पा रहे हैं।

 जिसका नतीजा यह हुआ कि जिन देशों में किसी प्रोडक्ट्स का उत्पादन चीन से इंपोर्टेंड वस्तुओं पर डिपेंड था उसमें कमी आ गई है।
  •  साथ ही जो वस्तु चीन को भेजी जाती थी वो भी ठप पड़ गई है, मसलन दक्षिण कोरिया की ऑटोमोबाइल कंपनी हुंडई ने बीते दिनों अपने विशाल पुरुसल संयंत्र में काम रोक दिया हैं।
  • दरासल चीन में कोरोना वायरस के संक्रमण के औद्योगिक उत्पादन पर असर पड़ा है। इससे वाहनों के कलपुर्जों की कमी हो गई है ,लिहाजा आॅटोमोबाइल कंपनी हुंडई को यह कदम उठाना पड़ा ।

कंपनी के फैसले से दक्षिण कोरिया में ही हजारों कामगार बेरोजगार हो गए हैं।
  •  चीन में कच्चे तेल की मांग में भी कमी देखी जा रही है । एक अनुमान के मुताबिक पिछले कुछ दिनों में कच्चे तेल की मांग में तकरीबन पंद्रह फीसदी तक की गिरावट आई है।
  • चीन कच्चे तेल का आयात खाड़ी देशों से करता है। लेकिन कम खपत के कारण चीन ने इनका आयात कम कर दिया है । जिससे खाड़ी देशों को भी नुकसान उठाना पड़ रहा है।
  • लिहाजा तेल उत्पादक देश कच्चे तेल की कीमत नियंत्रित करने के लिए इसके उत्पादन को कम करने की मांग कर रहे हैं।

 इस तरह लगभग सभी देश किसी न किसी रूप में कोरोना वायरस के चलते प्रभावित हो रहे हैं।
www.wifistudy.xyz
कोरोना वायरस की चपेट में अर्थव्यवस्था

प्रश्न - कोरोना वायरस से भारतीय अर्थव्यवस्था के किस तरह से प्रभावित होने की संभावना है?
उत्तर -  गौरतलब है कि कोरोना वायरस के असर से भारत भी अछूता नहीं है । कोरोना वायरस की वजह से भारत का चीन के साथ होने वाले आयात और निर्यात दोनों पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है। लेकिन ज्यादा असर आयात पर पड़ने की संभावना है। क्योंकि भारत चीन से आयात ज्यादा करता है और निर्यात कम ।
अलग दो महीनों से चीनी सामान का आयात बंद है । 
  • लिहाजा भारतीय बाजार चीन से निर्मित सामान खत्म होने लगे हैं।
  • क्योंकि भारत के बहुत सारे उद्योग कच्चे माल और कलपुर्जों के लिए चीन पर निर्भर है।
  • ऐसे में भारत में कोरोना वायरस से सबसे ज्यादा प्रभावित होने वाले क्षेत्र कंप्यूटर , मोबाइल , इलेक्ट्रॉनिक उपकरण, टेक्स्टाइल, खिलौने ऑटो मोबाइल और फार्मा हैं।

 भारतीय फार्मा उद्योग भारी मात्रा में एक्टिव फार्मास्युटिकल इंटीग्रेटेड एंड इंटरमीडियट ( APIR ) आयात के लिए चीन पर निर्भर है।
  •  देश में सत्तर फीसदी API चीन से आयात होता है।
  • दवाओं की सामग्री के आयात की ज्यादा निर्भरता होने की वजह से देश में जेनरिक दवाएं महंगी की संभावना है ।

फिलहाल भारत में इन उद्योगों के लिए कच्चे माल का आयात चीन से बंद है ।
  • आटो मोबाइल उद्योग पर कोरोना वायरस का नकारात्मक प्रभाव पड़ रहा है। क्योंकि भारत का आटोमोबाइल उद्योग चीन से आयातित पार्ट्स पर डिपेंड है। कपड़े से लेकर होली के रंगों तक भारतीय बाजार चीनी सामानों पर निर्भर है ।
  • ऐसे में कोरोना वायरस की वजह से आम लोगों के लिए इसलिए भी मुश्किल बढ़ेगी क्योंकि भारत में रोज़मर्रा की चीजें महंगी हो सकती है ।
  • मीडिया रिपोर्ट में देश में मोबाइल और खिलौने के स्टॉक जल्द ही खत्म होने की संभावना जताई जा रही है। जिसकी वजह से उत्पादों की भारत में कालाबाजारी की जा रही है।
  • स्थिती की गंभीरता को देखते हुए वित्त मंत्री निर्मला सीतारमन ने संबंधित क्षेत्रों को इस मामले में सतर्क रहने के लिए कहा है।
  • इन हालातों का एक पक्ष यह भी है कि भारत इस मौके को अपने निर्यात और घरेलू उत्पादन की क्षमता को बढ़ाकर वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला में अपनी भागीदारी बढ़ा सकता है। ताकि घरेलू जरूरतों को भी पूरा कर सके।

 लेकिन इस मामले में बड़ा सवाल यह है कि भारी चीन से बाहर किन देशों से जरूरी कच्चा माल या कलपुर्जे आयात करें और किन देशों को अपने उत्पाद बेचे।  फिर चीन जैसी क्षमता कम दिनों में हासिल नहीं की जा सकती।
  •  ऐसे में पहले से आर्थिक मंदी फंसी भारतीय अर्थव्यवस्था को ज्यादा सक्रियता से इस मुश्किल से निपटाना की जरूरत है ।
  • ऐसे में सवाल है कि ग्लोबल इकनॉमी और इंडियन इकोनॉमी के सामने क्या चुनौतियां हैं।
  • चुनौतियों की बात करें तो सबसे बड़ी चुनौती ग्लोबल सप्लाई चीन को बहाल करने की है । क्योंकि अगर चीन में जल्द ही सभी उद्योगों में उत्पादन बहाल नहीं हुआ तो इसका खामियाजा भारत समेत दुनिया के कई देशों को भुगतना पड़ सकता है।
  • लेकिन जीस तरह से कोरोना वायरस का संक्रमण फैलता जा रहा है। और अब तक भी इसकी कोई वैक्सीन या प्रॉपर इलाज खोजा नहीं जा सका है। एसे मे साफ तौर पर यह कहना मुश्किल है, कि हालात कितने दिनों में सामान्य हो सकेंगे।
  • यानी जो मौजूदा हालत है, उसकी रिकवरी कब हो सकेगी और इसका आकलन करना फिलहाल संभव नहीं है।
  • एक बड़ी चुनौती चीन के प्रतिस्थापन यानी ऑप्शन बनने की भी है। चीन ने खुद को दुनिया की फैक्टरी के रूप में विकसित किया है ।
  • वहाँ ऐसा इन्फ्रास्ट्रक्चर मौजूद है, लेकिन ठीक चीन की तरह ही माल बनाना ऐसा इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलप करना और कम समय में वैश्विक डिमांड को पूरा करना संभव नहीं है। कोरोना वायरस से उबरने के बाद द्वारा विश्वास बहाल करना भी एक बड़ी चुनौती होगी।
  • क्योंकि कोरोना वायरस का संक्रमण फैलने के डर से वैश्विक स्तर पर व्यापार और आवाजाही पर असर पड़ा है ।

देश और लोगों को पर्यटन और माल आवाजाही के लिए प्रेरित करना मुश्किल हो सकता है ।

 क्या हो आगे की राह-

कोरोना वायरस के कारण लंबे समय से बढ़ती मुश्किलों को देखते हुए वैश्विक स्तर पर गंभीरता से जांच किए जाने की जरूरत है।
  •  इस कड़ी में कोरोना वायरस के पीड़ितों का इलाज करने और कोरोना वायरस को फैलने से रोकने के लिए जागरूकता बढ़ानी होगी।
  •  वैश्विक स्तर पर हालात को संभालने के लिए कोरोना वायरस के कुक को जल्द से जल्द रोकने और उपभोक्ताओं का विश्वास बहाल करने की जरूरत है।
  •  क्योंकि बिना इसे नियंत्रण में लाए वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला को बहाल नहीं किया जा सकता ।
  • भारत को पब्लिक हेल्थ और व्यापार दो के लिए एक्शन मोड में बने रहना होगा।

कोरोना वायरस से चीन से आयात बंद होने पर भारत के कई उद्योग बंद हो सकते हैं।
 ऐसे में सरकार को गंभीरता से सोचने और कदम उठाने की जरूरत है।
  •  हम भले ही चीन से कपड़े, खिलौने, मोबाइल एक्सपोर्ट न करें लेकिन दवाइयों की जरूरतों का कोई विकल्प नहीं है।
  • इसलिए फार्मा उद्योग को संभालने की बेहद जरूरत है ।
  • भारत सरकार को इसे एक अवसर के रूप में लेते हुए घरेलू उद्योग को मजबूत करने पर ध्यान देना चाहिए।
  • घरेलू उद्योगों को बेहतर फाइनेंसिंग सुविधाएं मुहैया कराने की जरूरत है।

 ताकि निर्यात भागीदारी में वृद्धि और निर्बाध घरेलू आपूर्ति सुनिश्चित हो।

अधिक जानकारी के लिए यहां क्लिक करें click here

Post a Comment

Previous Post Next Post