Ad

www.wifistudy.xyz
RO प्यूरीफायर का पानी बना सेहत का दुश्मन https://www.wifistudy.xyz/2020/02/Soil-Health-Card.html

  • RO प्यूरीफायर का पानी बना सेहत का दुश्मन पर्यावरण मंत्रालय के द्वारा एक बेहद ही ख़ास अधिसूचना जारी की गई है,  जिसमें RO प्लांट के निर्मातओं और घरों में RO का पानी को बंद करने के निर्देश दिए गए हैं ।
  • पर्यावरण मंत्रालय द्वारा जारी सूचना राष्ट्रीय हरित अधिकरण के द्वारा दिल्ली में RO वाटर फिल्टर के उपयोग को रोकने को लेकर जारी आज इसकी वजह से आई है , NGT के मुताबिक RO प्लांट में पानी की काफी बर्बादी होती है ।

RO फ्यूरिफ़ायर मशीनों के निर्मातओं ने एक याचिका के द्वारा इस आदेश को चुनौती दी थी । इस याचिका की वजह से भारत सरकार को देश के स्तर पर यह सूचना जारी करनी पड़ी।
 सूचना को जारी करने के पीछे सरकार की मंशा पानी की बर्बादी को रोकना और RO द्वारा पानी में टीडीएस ( TDS ) की कटौती को रोकना है।
  • आपको बता दें कि RO प्लांट के जरिए कुछ ख़ास रसायन लाभकारी बैक्टीरिया और नमक खत्म हो जाती है। जो सेहत के लिए जरूर होती है ।
  • इसके अलावा घरों में इस्तेमाल होने वाले RO प्यूरीफायर पानी को साफ करने के लिए 80 फीसदी पानी बर्बाद कर देती है । कई शोध से यह पता चला है, कि पानी कुछ प्राप्त करने के दौरान लाभकारी खनीज जैसे- कैल्शियम और मैग्नीशियम भी पानी से हट जाते है ।

इस निर्देश में यह भी स्पष्ट किया गया है , कि इन पेंशनरों को तभी  बैंन किया जाएगा जब घरों में पीने वाले पानी की आपूर्ति भारतीय मानक ब्यूरो के मानदंडो के मुताबिक हो  गुणवत्ता के आधार पर भारत के शहरों को रैंकिंग प्रदान की ।
इस मानकों में सभी रैंक पार करके मुंबई पहले स्थान पर रहा  वही दिल्ली 19 , चेन्नई 9 और कोलकाता 10 समानकों पर खरा नहीं उतर पाया ।
style
www.wifistudy.xyz
RO प्यूरीफायर का पानी बना सेहत का दुश्मन



नीती आयोग द्वारा जारी समग्र जल प्रबंधन सूचकांक के मुताबिक 70 फीसदी जल आपूर्ति दूषित है।
  • एक गैर लाभकारी संस्था वाटर एंड द्वारा जारी गुणवत्ता सूचकांक की रैंकिंग में भारत को  122 देशों की सूची 110 वां स्थान मिला है ।

www.wifistudy.xyz
RO प्यूरीफायर का पानी बना सेहत का दुश्मन



सरकार द्वारा जारी की गई सूचना में खासतौर पर व्यवसायिक जल आपूर्तिकर्ताओं के लिए नियमों पर जोड़ दिया गया है ।
  • इसके अलावा जल  उपभोक्ताओं को जल गुणवत्ता के खा सूचक टीडीएस ( TDS ) के बारे में जानकारी मुहैय्या कराना भी इन दिशानिर्देशों का मकसद है । इन दिशानिर्देशों का मकसद यह भी सुनिश्चित करना है कि 2022 इसके बाद 25 फीसदी से ज्यादा शोधित पानी बर्बाद ना हो , और शोध के बाद निकले पानी का अन्य कार्यों जैसे - बागवानी आदि में इस्तेमाल हो सके निर्देश के अनुसार जिन जगहों पर पानी में टोटल डिजोल्ट सॉलिड  ( TDS ) की मात्रा 500 मिलीग्राम प्रति लीटर से कम है। वहाँ RO सिस्टम के इस्तेमाल पर रोक लगा दी जाए।
  • एनजीटी (NGT) के मुताबिक अगर टीडीएस (TDS) का स्तर 500 मिलीग्राम प्रति लीटर से कम है तो RO सिस्टम  उपयोगी नहीं होगा, बल्कि पानी में मौजूद महत्वपूर्ण खनिजों की हानि के साथ पानी की बर्बादी भी होगी ।
    www.wifistudy.xyz
  • RO प्यूरीफायर का पानी बना सेहत का दुश्मन
WHO के अध्ययन के अनुसार 300 मिलीग्राम प्रति लीटर के नीचे TDS स्तर वाले जल को उत्कृष्ठ , 900 मिलीग्राम प्रति लीटर टीडीएस (TDS ) स्तर वाले जल को  खराब और 1200 मिलीग्राम के ऊपर वाले स्पीड टीडीएस (TDS) वाली जल को अस्वीकार्य माना गया है ।
  • अधिकतर पीने का पानी उपलब्ध कराने  का काम हर शहर में नगर पालिका नगर निगम द्वारा किया जाता है, परंतु पानी को साफ करने के बारे में कम जानकारी और संसाधनों की कमी की  पश्चात नगर पालिका या नगर निगम अपना दायित्व पूरी तरह से नहीं निभा पाते ये स्थिति पूरे देश की बनी हुई है । यही कारण है कि आज ज्यादातर लोग अपने घरों में वाटर प्यूरीफायर लगाकर साफ पानी ले रहे हैं।
  • जलकी शुद्धिकरण में मुख्य रूप से फिल्ट्रेशन तथा अन्य संक्रमण , अल्ट्रावायलेट प्रक्रिया प्रयोग की जाती है। इस फ़ेडरेशन प्रक्रिया में सस्पेंडेड सॉलिड बड़ी माइक्रोलेंसिंग पेपर तथा कपड़े के बारीक -बारीक टुकड़े ,धूल के कण इत्यादि को जल से अलग किया जाता है। घरेलू स्तर पर फिल्टर में विशेष पदार्थ की झिल्ली यानी मेंब्रेन या काटरेज का प्रयोग किया जाता है । तथा इसे एक  बंद यंत्र यानी क्लोज सिस्टम में स्थापित किया जाता है, ये फिल्टर विभिन्न साइजों में उपलब्ध हैं । जैसे माइक्रो फिल्टर तथा अल्ट्रा फ़िल्टर यानी मेंब्रेन।
माइक्रो फिल्टर 0.04-1.0 माइक्रोमीटर  साइज के कणो तथा माइक्रोब्स को जल से अलग करता है।
www.wifistudy.xyz
RO प्यूरीफायर का पानी बना सेहत का दुश्म

 किसी भी फील्ड से सरफरोश नाइट्रेट तथा भारी धातुओं की आयनो को पानी से दूर नहीं किया जा सकता है।
  • सामुदायिक स्तर पर पर जल शुद्धिकरण हेतु स्लो सैंड फिल्ट तथा रेपिड सेंट  फिल्टर का इस्तेमाल किया जाता है। जो नगर पालिका नगर निगम स्तर पर किया जाता है।
  • रिवर्स ऑस्मोसिस प्रक्रिया वह प्रक्रिया है  जिसमें जल को एक प्रेशर द्वारा एक अर्ध पारगम्य चिली से पार कराया जाता है। इस प्रक्रिया में जल उपस्थित अधिक  संधाता वाली झिल्ली के एक तरफ रह जाते हैं, तथा शुद्ध जल दिल्ली को पार कर जाता है। एक RO मेंब्रेन का इस्तेमाल 2 से 5 वर्ष तक किया जा सकता है।
  • इस प्रक्रिया की विशेषता ये है कि पानी में मौजूद तकरीबन सभी अकार्बनिक आयनों गंदापन तथा बैक्टीरिया एवं पैथोजन को भी पानी से हटा देता है । पर यह तकनीक बहुत अधिक खर्च की है, और साथ ही साथ इस प्रक्रिया में जल शुद्धिकरण में बहुत अधिक पानी की बर्बादी भी होती है पानी में मौजूद बैक्टीरिया कई तरह के रोगों की वजह बनता है।  पानी को पीने लायक बनाने के कुछ ख़ास रसायनों जैसे क्लोरीनडाई ऑक्साइड , chloramine , ओजोन आदि का इस्तेमाल किया जाता है। पर क्लोरीन और इसके अन्य योगीको के इस्तेमाल से कई और पदार्थ ट्राईहेलो मिथेन तथा helloacetic acid पैदा हो जाते हैं । जो सेहत के लिए बेहद नुकसानदायक होते हैं।
  • www.wifistudy.xyz
    RO प्यूरीफायर का पानी बना सेहत का दुश्मन
ओजोन का इस्तेमाल बहुत कम किया जाता है।  ultraviolet light का प्रयोग असंक्रमणीय के लिए सबसे ज्यादा लोकप्रिय है , आज बाजार में उपलब्ध वाटर प्यूरीफायर में उपरोक्त बताई गईं तकनीकों के प्रयोग के अनुसार कंपनियां भी बढ़ी कीमतें वसूल कर रही है।

  •  भारतीय मानक ब्यूरो द्वारा पीने के पानी हेतु निर्धारित समानकों के मुताबिक अगर पानी में टीडीएस(TDS) 500 MG प्रति लीटर से कम है , तो किसी फ़िल्टर की जरूरत नहीं है । बशर्ते किस पानी मे कोई विशेष अशुद्धि नहीं है।
  • RO वाटर प्यूरीफायर रिश्ते माल से टीडीएस (TDS) 20 लीटर  प्रति MG पर आ जाता है ।आपको बता दें तो भारतीय मानक ब्यूरो अनुसार पीने के पानी में कैल्शियम की मात्रा कम से कम 75 mg/लीडर तथा मैग्नीशियम के कम से कम 30 MG  प्रति लीटर होनी चाहिए ।
 "इस आधार पर देखें तो बढ़ते आरओ वाटर प्यूरीफायर का संकट पानी को लेकर हमारे वातावरण को दूषित के साथ-साथ हमारे शरीर के लिए भी  हानिकारक साबित हो रहा है।"

अधिक जानकारी के लिए यहां क्लिक करें click here

1 Comments

Post a comment

Previous Post Next Post