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अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति

भारतीय जनजातियों ( indian cheduled Tribes ) का तात्पर्य है वे जनजातियां जो की भारत के मुख्य भूमि में स्थिर तो रहता है, परंतु वह भारत की संस्कृतिक, आर्थिक, राजनीतिक तथा भूखंड में जुड़े विकास से अपने आप को अलग-थलग रखकर कार्य करता है ।

जनजातियों के लिए भारत सरकार द्वारा तथा भारतीय संविधान के द्वारा इन्हें मुख्य सीमा से जुड़ने के लिए अनेक संवैधानिक प्रावधान किया गया है ।
जो इस प्रकार है-
भारतीय संविधान के अनुच्छेद 366(25) के तहत अनुसूचित जनजातियों को परिभाषित करते हुए अनुच्छेद 342 का हवाला दिया गया , अनुच्छेद 362(25) के अनुसार अनुसूचित जनजाति से ऐसी जनजातिओ जनजाति समुदाय या उनके भाग अभिप्रेत है। जिन्हें अनुच्छेद 342 के तहत अनुसूचित जनजाति समझा जाता है।
 वही अनुच्छेद 342 के अनुसार राष्ट्रपति किसी राज्य या संघ राज्यक्षेत्रों के सम्बन्ध में सम्बन्धित राज्य के राज्यपाल से परामर्श कर राज्य के किसी जनजाति जनजाति समुदाय अनुसूचित जनजाति के रूप में निर्धारित कर सकता है।
 यह एक बात नोट करने लायक है कि " भारतीय संविधान में अनुसूचित जनजातियों की कही स्पष्ट परिभाषा नहीं है"



अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति


जनजातियों से संबंधित मौलिक व क्षेत्रीय वितरण इस प्रकार है-

  • उत्तर व पूर्वोत्तर क्षेत्रों-
 इसके तहत कश्मीर, हिमाचल प्रदेश , उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश, बिहार पूर्वोत्तर के राज्य जिसे संबंधित प्रमुख जनजातियां इस प्रकार हैं । बकरवाल, गुरजार , थारु, बुक्सा , राजी ,जौनसारी ,शौका , घोटिया, गद्दी ,किन्नौरी ,गारो, खासी, जयंतिया, ब्रू , नागा, नोक , बोडो ,कौनयाक , अपातनी , चकमा, चक्का आदि  जनजाति रहते हैं ।


  • मध्य क्षेत्र व प्रायद्वीपीय भारत के पठारी और पहाड़ी क्षेत्रों -

इसमें मध्य प्रदेश ,दक्षिण राजस्थान, गुजरात, दक्षिण उत्तर प्रदेश ,झारखंड ,छत्तीसगढ़ ,ओडिशा और आंध्र प्रदेश राज्य आते है ।
जिनसे संबंधित प्रमुख जनजातियां  है। भील, गोड, रेड्डी, संथाल हो , डोंगरियाकोंध , मुंडा , कोर्वा , उरांव, ओल, बंजारा, मीणा ,कोली तथा  यानिदि जनजातीय शामिल हैं । 


अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति



  • दक्षिणी क्षेत्र में शामिल राज्यों -

इस चित्र में शामिल राज्यों की बात करें तो कर्नाटक, तमिलनाडु और केरल आदि राज्यों में शामिल है।  जिससे संबंधित प्रमुख जनजातियां हैं तो टोडा , कुरमा, गोंड , टडार और इरुला दिया।

  • अंडमान निकोबार द्वीप  क्षेत्र 

इस राज्य में  सेंटिनल, ओर , जारवा ,सौंपेन और टेबो आदि जनजाति शामिल हैं।
 तो चलिए अब देखते है , प्रमुख चर्चित जाती है।

  • तीवा या  लालूगं जनजाति-
 यह जनजाति वांचुवा त्योहार मनाती हैं। 
त्योहार में अच्छी फसल और खेतों से अपनी फसल की रक्षा के लिए प्रार्थना की जाती है ।
यह जनजाति मुख्य रूप से असम और मेघालय में निवास करती है ।
इसके अलावा यह झूम खेती पर बल देती है।



अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति

  •  इरुला जनजाति
   तमिलनाडु में रहने वाली जनजाति को आम तौर पर स्नेक कैचर्स, स्नेकमैन, स्नेक चार्मर्स इत्यादि नाम से जाना जाता है



  • अब्बूझ मारिया
  इन्हें वन अधिकार अधिनियम 2006 के तहत छत्तीसगढ़ में आवाज़ का अधिकार दिया जाएगा।
 यह जनजाति छत्तीसगढ़ के बस्तर क्षेत्र के अबूझमाड मे निवासरत हैं।
 यह पार्टिकुलरली वल्नरेबल पार्टी ग्रुप यानी पीवीटीजी (PVTG) में शामिल हैं ।

  • चेचू जनजाति-

 यह बिग कैट्स के संरक्षण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं ।
जे जनजाति पार्टिकुलरली वल्नरेबल पार्टी ग्रुप यानी पीवीटीजी(PVTG)  की सूची में तेलंगाना और आंध्र प्रदेश की जनजाति के तौर पर सूचीबद्ध है।


अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति

  •  ब्रू या रियांग जनजाति-
उत्तर पूर्वी भारत की एक  देशज जनजाति है। यह ज्यादातर त्रिपुरा , मिज़ोरम और असम में निवास करती है । 1997 में  मिजोरम में मेरे जनजाति के साथ किए संघर्ष के दौरान बड़ी संख्या में इस जनजाति के लोग त्रिपुरा के शिविरों में भाग आए थे।  जी नहीं अभी हाल ही में मोदी सरकार के द्वारा समझौता करके आत्मसमर्पण कराया गया।

  • जोमी जनजाति - 

इस जनजाति ने मणिपुर सरकार से नई जोलैंड टेरिटोरियल काउंसिल यानी जेडटीसीसी (ZTC) के गठन की मांग की थी। ये जनजाति  मणिपुर शहीद नागालैंड, मिज़ोरम ,असम तक फैली है ।
जोमी जनजाति में गंटे, कोम , पैटो,  सीमटे, तेदिम, चिन, थागंखल ,जोऊ और बैफेई जनजाति शामिल हैं ।


  • कोन्यक जनजाति

 नागालैंड के मोन जिले के एक नागा जनजाति जाती है । गिनीज़ वर्ल्ड रिकॉर्ड ने नागालैंड की कोन्यक डांस को सबसे बड़े परंपरागत डांस का दर्जा दिया था।


अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति



  • चकपा समुदाय-
 यह मणिपुर से संबंधित है। इस समुदाय की बहुलता वाले गांव फयेंग को देश के पहले कार्बन पॉज़िटिव टैग का दर्जा दिया गया है । 

  • छिपा समुदाय 
यह राजस्थान का एक समुदाय है। राजस्थान के बांगरु में तीतानवाला संग्रहालय में छिपा समुदाय की हाथ से बनाई गई ब्लॉक  प्रिंटिंग को शामिल किया गया था।


  • सेंटिनलीज जनजाति
       अंडमान के उत्तरी सेंटिनल द्वीप पर रहने वाले एक आक्रामक नेग्रीटो जाती हैं । यह बाहरी दुनिया के प्रति शत्रु पूर्ण व्यवहार रखती है।  कुछ साल पहले एक अमेरिकी पर्यटक की हत्या के चलते यह जनजाति काफी चर्चा में रही।

  • यनादी जनजाति-
    आंध्र प्रदेश की खाना दुर्जन जाती है। लोकसभा चुनाव में पहली बार अपने मताधिकार का प्रयोग करने के लिए यह सुर्खियों में रही है ।
अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति

  • अपातिनि जनजाति-
 यह अरुणाचल प्रदेश से संबंधित है । जनजाति को मनुष्य तथा प्राकृत तथा कृति के मध्य सौहार्दपूर्ण सहअस्तित्व के उदाहरण के रूप में देखा जा सकता है । 

जनजातियों से संबंधित कुछ अन्य संवैधानिक प्रावधान -

  1. अनुसूची 5 में अनुसूचित क्षेत्रों तथा अनुसूचित जनजातियों के प्रशासन पर नियंत्रण के प्रावधान किए गए हैं।
  2. अनुसूची 6  में असम ,मेघालय ,त्रिपुरा और मिज़ोरम राज्यों में जनजातीय क्षेत्रों के प्रशासन का उपबंध है। 
  3. अनुच्छेद 46 में राज्यों के अनुसूचित जाति जनजाति तथा अन्य दुर्बल वर्गों की शिक्षा और अर्थ असंभव नहीं हितों की रक्षा करने का आदेश देता है ।
  4. अनुच्छेद 164 में छत्तीसगढ़, झारखंड,  मध्य प्रदेश और ओडिशा राज्यों में जनजातियों के कल्याण हेतु एक भारसाधक मंत्री का प्रावधान है।
  5. इसी तरह अनुच्छेद 243 D तथा 243 T क्रमशः पंचायतों व नगर पालिकाओं में अनुसूचित जनजाति हेतु आरक्षण का प्रावधान है ।
  6. अनुच्छेद 330, लोकसभा में अनुसूचित जनजाति हेतु सीटों का आरक्षण प्रदान करता है । 
  7. अनुचित 332 राज्य विधानसभाओं में अनुसूचित जाति और जनजाति हे तो सीटों का आरक्षण देता है । 
  8. अनुच्छेद 338 A के तहत राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग की 2004 में स्थापना की गई । जो 89 वे संशोधन 2003 से संबंधित थी।
 चलिए अब हम जनजातीय से जुड़ा एक एक आवश्यक सूचना देखते है, इसमें PVTGs यानी पार्टिकुलरली वल्नरेबल ट्राइब्स ग्रुप की बात की गई है । 75 आदिवासी समूहों को गृह मंत्रालय द्वारा विशेष रूप से कमजोर जनजाति समूह के रूप में वर्गीकृत किया गया है। ये जनजाति समूह 18 राज्यों सहित अंडमान निकोबार द्वीप समूह से संबंधित है ।


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