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  हड़प्पा सभ्यता

हडप्पा सभ्यता व संस्कृति का उद्देय ताम्रपाषाणिक पृष्ठभूमि में भारतीय उपमहाद्वीप के पश्चिमोत्तर भाग में हुआ था। इसका नाम हडप्पा  पड़ा क्योंकि 1921 में पहली बार इसके हडप्पा नामक स्थल की खोज हुईं। 
 इसका फैलाव उत्तर में जम्मू से लेकर दक्षिण में नर्मदा के मुहाने तक और पश्चिम में बलूचिस्तान के मकरान समुद्र तट से लेकर उत्तर पूर्व में मेरठ तक था ।

हड़प्पा संस्कृति के प्रमुख स्थल

  •  हड़प्पा, मोहनजोदड़ो, लोथल, धौलावीरा , राखीगढ़ी , कालीबंगा, रोपड आदि है।

सामाजिक एवं धार्मिक जीवन

  •  यहाँ पर समाज की इकाई परंपरागत तौर पर परिवार थी , तथा मातृ देवी की पूजा तथा मोहरो पर अंकित चित्र से यह पता चलता है, कि हड़प्पा समाज संभावित मातृसत्तात्मक था।


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हड़प्पा सभ्यता


 नगर योजना एवं संरचना

  •   इसमें नगर योजना प्रणाली, जल निकास प्रणाली तथा सफाई इस सभ्यता की प्रमुख विशेषताएं रही है । 
  • हडप्पा, मोहनजोदड़ो नगर अपने अपने दुर्ग थे। जिनमें शासक वर्ग रहता था, तथा दुर्ग के बाहर निम्न स्तर के शहर थे जहाँ ईंटों के मकानों में सामान्य लोग रहते थे ।
  • नगर अनेक खंडों में विभक्त थे। तथा सड़कें एक दूसरे को समकोण पर काटती थी।
  • आमतौर पर प्रत्येक घर में आंगन, एक रसोई घर तथा एक स्नानागार होता था।  

इसके अतिरिक्त अधिकांश घरों में कुओ के अवशेष भी प्राप्त हुए हैं।

हडप्पा सभ्यता से संबंधित पूजा एवं देवी देवताये

  • यहाँ पक्की मिट्टी की स्त्री मूर्तिकाएं तथा मुहरो में इनके चित्र दिखाई पड़ते हैं ।
  • सिंधु सभ्यता के लोगों के धार्मिक दृष्टिकोण का आधार  एकलौकिक तथा अधिक व्यावहारिक था ।
  • हड़प्पा से प्राप्त एक  स्त्री मृण्मूर्ति के गर्भ से एक पौधे का निकलना यह प्रदर्शित करता है, कि हड़प्पा के लोग धरती को उर्वरता की देवी समझते थे।
  •  प्राप्त साक्षियों के द्वारा पाया गया है कि हड़प्पाकालीन लोग पशुपति देवता , लिंग, योनि, पशुओं तथा वृक्षों की पूजा करते थे।

साथ ही वे तंत्र - मंत्र , ताबीज आदि चीजों पर विश्वास रखते थे ।


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हड़प्पा  सभ्यता नृतिका

हड़प्पा सभ्यता का आर्थिक एवं तकनीकी जीवन 

कृषि एवं पशुपालन 

  • पूर्व काल में हिन्दू प्रदेश में प्राकृतिक वनस्पति संपदा अधिक थी। फलस्वरूप वर्षा अधिक होती थी , जिससे कृषि हेतु पर्याप्त जलवायविय दशाएं मौजूद थीं ।
  • सिंधु सभ्यता के लोग गेहूं ,जौ, राइस, मटर आदि अनाज उपजाते थे ।
  • जिनमें लोथल के लोग 1800 ईस्वी पूर्व में चावल की खेती करते थे ।
  • कपास का उत्पादन सबसे पहले सिंधु क्षेत्रों में ही माना जाता है।
  • हड़प्पाई लोग बेल, भैस ,बकरी ,भेड़ , सुअर , कुत्ते तथा बिल्ली पालते थे । 

भोजा ढोने के लिए वे शायद गद्दे एवं ऊट का इस्तेमाल करते थे ।
हडप्पाई लोग हाथी तथा गेंडा से भी परिचित थे ।

 हड़प्पा सभ्यता का व्यापार 

  • सिंधु सभ्यता के लोगों के जीवन में व्यापार का बड़ा महत्व था। सिंधु सभ्यता के लोग पत्थर , धातु, हड्डियों आदि का व्यापार करते थे।
  • वे धातु के सिक्कों का प्रयोग नहीं करते थे , ऐसा माना जाता है कि वे सारे आदान प्रदान विनिमय द्वारा करती थीं।
  • सिंधु  सभ्यता के लोग बंदरगाह का उपयोग करते थे। तथा वे पहियो वाली गाड़ियों से भी परिचित थे।
  • वे अनाज तथा तैयार माल के आवागमन हेतु संभवत नौ एवं बैलगाड़ियों का प्रयोग करते थे।

 हडप्पाई लोगों का व्यापारिक संबंध राजस्थान के कुछ क्षेत्रों अफगानिस्तान तथा ईरान से था।


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हड़प्पा सभ्यता की मोहर

 हड़प्पा सभ्यता की लिपि, शिल्प तथा तकनीकी ज्ञान

  •  हड़प्पाई लोगों की अपनी स्वयं की लिपि थी , जो अब तक पड़े ही नहीं जा सकी हैं।
  • यहा पत्थर मोहरों तथा अन्य वस्तुओं पर इस लेखन के लगभग 400 नमूने प्राप्त हुए हैं।
  •  इनके लिए चित्रात्मक थी। जो दाई से बाईं ओर लिखी जाती थी।
  • लिपि के आविष्कारक के चलते हडप्पाई लोग निजी संपत्ति का लेखा जोखा आसानी से रखने में सक्षम हो गए होंगे। 
  • वह व्यापार एवं आदान प्रदान में मापतौल हेतु बाट, माप के निशान वाले डंडों का उपयोग करते थे ।
  • वे कुम्हार के चाक का उपयोग करना जानते थे, तथा बर्तनों में विभिन्न रंगों की चित्रकारी करने में  निपुण थे।
  •  साथ ही यहाँ की स्वर्णकार का चांदी, सोना ,रत्नों के आभूषण तथा मारियो के निर्माण में निपुण थे ।

हडप्पाई लोगों की मृदभांड ख़ान विशेषताएं उनका चिकनापन तथा चमकीला होना है ।


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हड़प्पा सभ्यता

 हड़प्पा सभ्यता का राजनीतिक जीवन 

  • हडप्पाईयो के राजनीतिक जीवन का कोई स्पष्ट प्रमाण नहीं मिलता हैं।
  • किंतु सिंधु सभ्यता की एकता को देखने पर यह किसी केंद्र सत्ता द्वारा चलाए मन प्रतीत होती हैं।
  • धार्मिक विश्वास और आचारों में एकरूपता न होने के कारण यह किसी पुरोहित वर्ग द्वारा स्थापित सत्ता भी नहीं माना जा सकती ।
  • हडप्पाई लोग वाणिज्य की ओर अधिक उन्मुख दिखाई देते थे , संभवत हड़प्पा का शासन वाणिज्यवर्ग के हाथों में रहा होगा ।

इसके अतिरिक्त हड़प्पा काल में अस्त्र शस्त्र का अभाव भी देखा गया ।

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