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15 वें वित्त आयोग (FINANCE COMMISSION)


चर्चा में क्यों ?

15 वें वित्त आयोग (FINANCE COMMISSION) की अंतरिम रिपोर्ट 2020-21 संसद मे पेश हुई है ।

आयोग ने वित्त वर्ष 2020-21 के लिए करवाया जा सके विभाग की कुल के उद्धार विभाजन यानी वर्टीकल डिविजन में 1 फीसदी की कमी के साथ राज्यों को 41 फीसद देने की हरीश की है।

  • 15 वें वित्त आयोग (FINANCE COMMISSION) के अध्यक्ष श्री एन के सिंह है।
  • 15 वें वित्त आयोग (FINANCE COMMISSION) की अवधि एक साल बढ़ाने से आयोग को दो रिपोर्ट सौंपनी थी जिसमें 2012-26 की अवधि के लिए तीस अक्टूबर 2020 तक दूसरी रिपोर्ट सौंपी जाएगी ।
संविधान के अनुच्छेद 280(क) में वित्त आयोग (FINANCE COMMISSION) के गठन की चर्चा की गई है, वहीं अनुच्छेद 281 मे आयोग को अनुशंसा का जिक्र मिलता है ।
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हालिया अनुशंसा के आधार
आय अंतराल (Income sisters)


                  किसी राज्य की आय का सबसे अधिक आय वाले राज्य की आय के अंतर को शामिल किया गया है, जिसमें निम्नतर प्रति व्यक्ति आय वाले राज्यों को अधिकतम हिस्सा प्रदान किया जाएगा इसके अलावा 14 वें वित्त आयोग है, 50 फीसदी के बाद इस बार 45 फीसदी अधिभार तय किया गया है ।

जनसंख्या (Population)

 वित्त आयोग (FINANCE COMMISSION) ने राजकोषीय समीकरण के हित में नवीनतम जनगणना 2011(15%) के आंकड़ो का उपयोग किया है । 14  वें वित्त आयोग ने 1971 और 2011 दोनों की आबादी का उपयोग किया था । उपयोग 2011 की जनसंख्या जो कि 10 फीसद थी। उसकी तुलना में 1971 जनसंख्या (17.5%)  प्रतिशत को अधिक भार दिया गया था।

 वन पारिस्थितिकी (forest and ecology) 

इसके अनुसार राज्य की कुल वन सघनता का सभी राज्यों के कुछ संघनता में हिस्सा निर्धारित करके इसकी पात्रता निर्धारित की गई है।
 इसका अधिभार 10 फीसद है।

जनसांख्यिकी प्रदर्शन (demographic performance) 

इसमें मे 2011 जनसांख्यिकी आंकड़ों के आधार पर अनुशंसा की जाएगी और कम प्रजनन अनुपात वाले राज्यों को अंक दिए जाएंगे इसका अधिभार (12.5) फीसदी है ।

कर प्रयास

कुछ कर संग्रह दक्षता वाले राज्यों को पुरस्कृत करना , इस मानदंड का मकसद है ,2013-14 और 2015-16 के बीच तीन साल की अवधि के दौरान प्रति व्यक्ति आय कर राजस्व औसत प्रति व्यक्ति राज्य जीडीपी(GDP) के अनुपात के रूप में इस की गणना की गई है । इसका अधिभार 2.5% तक है ।


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15 वें वित्त आयोग (FINANCE COMMISSION)



प्रमुख अनुदान सहायता

राजस्व घाटा अनुदान

इसके अनुसार कर हस्तांतरण के बाद अनुमान है कि 2020-21 में 14 राज्यों का कुल राजस्व घाटा और लगभग75,340 करोड रुपये होगा इन राज्यों के लिए राजस्व घाटा अनुदान की सिफारिश की गई है।

विशेष अनुदान

जिसके अनुसार 2019-20 की तुलना में 2020-21 उसमें तीन राज्यों कर्नाटक मिज़ोरम और तेलंगाना के कर हस्तांतरण में कमी आएगी । इसलिए छह हज़ार सात सौ चौंसठ करोड़ रुपये का विशेष अनुदान रखा गया है।

सेक्टर विशेष के लिए अनुदान

जिसमे 2020-21 में पोषण के लिए सात हज़ार तीन सौ पचहत्तर करोड़ रुपये का अनुदान रखा गया है । जिसमें पोषण स्वास्थ्य पूर्व प्राथमिक शिक्षा ग्रामीण संपर्क रेल आदि के लिए अंतिम रिपोर्ट में अनुदान उपलब्ध कराया जाएगा।

स्थानीय निकायों के लिए अनुदान

इसके अनुसार स्थानीय निकायों के लिए 2020-21 में 90 हज़ार करोड़ रुपये तय किए गए ये अनुदान पंचा के तीन स्तरों गांव ब्लॉक और जिला स्तर पर उपलब्ध होंगे । इसमें आबादी और क्षेत्रफल के आधार पर 90: 10 के अनुपात में राज्यों के बीच अनुदान का वितरण किया जाएगा।

आपदा जोखिम प्रबंधन अनुदान

स्थानीय स्तर पर राहत कार्यों को बेहतर बनाने के लिए आयोग ने राष्ट्रीय और राज्य आपदा प्रबंधन फंड के गठन की सिफारिश की है। इसमें साल 2020-21 में राज्य आपदा जोखिम प्रबंधन फंड के लिए अट्ठाईस हज़ार नौ सौ करोड़ रुपये का आवंटन किया गया है। इसमें केंद्र और सभी राज्यों के बीच यह अनुपात 75 अनुपात 25 जबकि पूर्वोत्तर व हिमालय राज्यों के लिए 90 अनुपात 10 में रखा गया है ।

तो चलिए अब देखते है कुछ अन्य

तमिलनाडु को छोड़कर दक्षिण राज्यों के हिस्से दो उन्हें गिरावट आई है ।जबकि कर्नाटक को सबसे बड़ी हानि हुई है । महाराष्ट्र हिमाचल प्रदेश और पंजाब की हिस्सेदारी में मामूली बढ़त देखी गई है । जबकि इन राज्यों की प्रजनन दर प्रतिस्थापन तरसे नीचे आंध्र प्रदेश केरल कर्नाटक और पश्चिम बंगाल जैसे राज्यों की हिस्सेदारी में कमी आई है। जबकि इन राज्यों के प्रजनन दर अपेक्षाकृत कम है । रक्षा खर्च के लिए अव्यक्त निधि शुरू करने के लिए एक विशेषज्ञ टीम के गठन का प्रस्ताव किया गया है।



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